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यूनिवर्सिटी सीरीज़ से एक राजनीतिक ज्ञान प्राप्त हुआ है. जिसे भविष्य में नेता बनना है, उसे एक आइडिया दे रहा हूं. भारत के युवाओं को सिर्फ दो चीज़ चाहिए. मैं सीरीयस हूं, व्हाट्सऐप की बात नहीं कर रहा. ये दो चीज़ है प्रॉमिस और एडमिशन, वादा और नामांकन. कोई गोदाम हो, कोई खंडहर हो, बस एडमिशन काउंटर खोल दीजिए, युवा जाकर एडमिशन ले लेंगे. भारत के युवाओं को तीन से पांच साल के लिए एडमिशन लेना अच्छा लगता है. क्लास में प्रोफेसर न हो तो और भी अच्छा लगता है. बेशक सारे युवा ऐसे नहीं हैं. जिनके माता पिता कोचिंग यूनिवर्सिटी के लिए लाखों जुटा लेते हैं वो पार हो जाते हैं या उनकी अलग समस्या है. मगर बाकी करोड़ों युवाओं की धार को भोथरा करने के लिए जो कॉलेज खुले पड़े हैं, उन्हें अब दुनिया की कोई ताकत बेहतर नहीं कर सकती है. ये छात्र न तो स्किल डेवलपमेंट के लायक रह पाते हैं न ह्यूमन डेवलपमेंट के. हमारे सहयोगी दिनेश मानसेरा आपको उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी के कैंपस ले जाना चाहते हैं, इमारत तो ऐसी है कि सेल्फी खींचाने का मन करेगा, कहानी का प्लॉट ऐसा है कि इंटरवल से पहले सिनेमा छोड़कर भाग जाने का मन करेगा.

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